मैं कौन हूं ?
मैं क्या हूं ?
मैं आजाद हूं
आजादी मुझे चाहिये
मैं हिन्दू मैं मुसलमान
मैं सीख मैं ईसाई
मेरा राम, मेरा अल्लाह
मेरा वाहे गुरु,मेरा जीसस
मजहब के नाम पर
क्यों लड़ रहें हैं भाई भाई
ये कैसा धार्मिक उन्माद ?
मजहब तो नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना
फिर धर्म के नाम पर
ये कैसी आजादी की चाह हैं ?
ये नहीं है आजादी ।
कहीं हैं आतंकवाद
कहीं हैं उग्रवाद
कहीं हैं नक्सलवाद
कहीं हैं धार्मिक उन्माद
सभी को अपनी अपनी
आजादी हैं चाहिए
नहीं किसी को देश की फ़िकर
ये कैसी आजादी की चाह हैं ?
ये नहीं है आजादी।
कहीं बहू जल रही
कहीं बलात्कार हो रहा
कहीं हत्यारे अपने बने
कहीं लालच फूल रहा
सब के सब अपनी ही आग में जल रहे
नहीं किसी को देश की फ़िकर
ये कैसी आजादी की चाह है ?
ये नहीं है आजादी ।
कहीं तन पर कपड़ा नहीं
कहीं भूख पेट में अन्न नहीं
कहीं शिक्षा का अभाव है
कहीं शिक्षित बेरोजगार हैं
जब तक ऐसा चलता रहेगा
आजाद होकर भी आजाद नहीं है हम
ये नहीं है आजादी ।
अगर चाहिए आजादी
गायत्री मंत्र अपनाना होगा
हम बदलेंगे युग बदलेगा
हम सुधरेंगे युग सुधरेगा
तब ही होगा शांति चारों ओर
तब ही सुदृढ़ होगा देश
तब ही सुदृढ़ होंगे हम
तब ही मिलेगी आजादी
वही होगी असली आजादी
वही होगी असली आजादी
ऋषिकेश अग्रवाल
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