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हे वीणा वादिनी

Sandeep kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            (१) शीश झुका चरणों में मां;उर से तेरा ही बंदन है ।
        
                                                    
                            
वीणा के तार झंकृत कर मां;बस तेरा ही अवलंबन है।।
(२) कोटि-कोटि प्रणाम तुझे मां; कोटि-कोटि है तुझे नमन।
कविता को नई दिशा दे मां; यश फैले नित दूर गगन।।

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6 वर्ष पहले
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