पिंजरे के पंछी से पूछो आज़ादी के मायने क्या होते हैं,
क्या फायदा उन पंखो का जो भर न सकते हों परवाज़,
शत शत नमन मेरा उन शहीदों को जिनकी बदौलत,
हम आज़ाद फिज़ा में खुल कर लेते हैं सांस आज,
अब हों हम सब आत्मनिर्भर यही है वक़्त की दरकार,
एक उज्ज्वल भविष्य की सुंदर छवि का ये सपना हो साकार,
बढें शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, और हो औद्योगिक विस्तार,
देश के युवा हैं सक्षम जो बनेंगे कल के कर्णधार,
सांस्कृतिक, धार्मिक स्तर पर भी हम हैं सबसे आगे,
देश को उन्नति के पथ पर ले जाने को अब देशवासी जागे,
विश्व में बनी है भारत की एक अलग पहचान,
है सारे जहां से अच्छा मेरा प्यारा हिंदुस्तान,
यही हैं आज़ादी के मायने हम सब जाएं जान।
यही हैं आज़ादी के मायने हम सब जाएं जान।।
-- संजय भाटिया
डी एल एफ़ 3, गुरुग्राम
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