“कई बार”
कई बार.....
कहाँ जाना है पता नहीं लेकिन
बस कहीं जाने को दिल करता है
कई बार.....
क्यों जाना है पता नहीं लेकिन
बस चले जाने को दिल करता है
कई बार.....
सिमटना ज़रूरी है पता है लेकिन
बस बिखर जाने को दिल करता है
कई बार.....
बहुत दूर जाना है पता है लेकिन
बस ठहर जाने को दिल करता है
- संजय वर्मा
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