आओ बैठ कर हम ,
पुराना हिसाब करते हैं ।
चलो महबूब हम ,
फ़िर वही इश्क़ करते हैं ।।
तुम्हारी हसरतों पर हम ,
फ़िर अपनी जान रखते हैं ।
आओ महबूब हम ,
फ़िर वही इश्क़ करते हैं ।।
अपनी न सही उस बेवफ़ाई की,
थोड़ी तो कदर करते हैं ।।
जिसके दम से हम आज भी ,
सिर्फ़ तुमसे इश्क़ करते हैं ।।
गर इश्क़ ही होता बस ,
हमारी मुहब्बत में सनम ।।
परवान चढ़ा था जब इश्क़ अपना ,
ब खुदा तुम्हें भूल जाते हम ।।
ये इश्क़ की ताक़त नहीं है ,
तेरे मेरे बेवफ़ा सनम ।।
ये बेवफ़ाई है जिसके दम से,
जिंदा है हमारा इश्क़ सनम ।।
जिसे नहीं मिला ये ,
बेवफ़ाई का दर्द सनम ।।
उसे हुआ ही नहीं था,
क़भी मेरे बेवफ़ा इश्क़ सनम ।।
जो एहसास बेवफ़ाई से मिलता है,
मेरे बेवफ़ाई सनम ।।
वो इश्क़ कहाँ देखने को मिलता है,
मेरे बेवफ़ा सनम ।।
इश्क़ का इकरारनामा होते ही ,
आगोश में हम होते सनम ।।
चलो बेवफ़ा तुम ही बताओ ,
फिर इश्क़ कैसे करते हम ।।
लबों चूमते क़भी आग़ोश में कसते,
महज़ हसरतें मिटाते हम ।।
चलो बेवफ़ा तुम ही बताओ,
फिर इश्क़ कहाँ करते हम ।।