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6 अगस्त

Sanzida sanju

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तमाम रात उसकी हंसी की याद में मस्त रहा ।
        
                                                    
                            
तमाम दिन उन बोझल आंखों में पस्त रहा ।

उसने भी मुझे थोड़ा देखा , थोड़ी बात भी हुई ।
यार वो पहली मुलाकात का वाकया ज़बरदस्त रहा ।

तेरा आना ही वजह था शायद की कोई गड़बड़ी नहीं की ,
वरना तमाम उम्र मैं बेतहाशा अस्त व्यस्त रहा ।

जहां उनको रिकॉर्ड करना था और जहां वो बैठे थे ,
किसी न किसी बहाने से मैं वहीं लगाता गश्त रहा ।

थकन भरे लहजे में लिखता था अशआर यूँ ही ,
मेरी शायरी में जान डालने वाला दिन 6 अगस्त रहा ।
 
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4 वर्ष पहले
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