कैसे बताऊं की कैसी परेशानी में हूं..?
की कागज की नाव हूं और पानी में हूं..!
हमे छोड़कर जाने वाले तो, खुश होंगे शायद
उन्हे बताए जाकर कोई।
की रुकी हैं धड़कने ,और मैं अब भी एक रबानी में हूं।
वो नही था मुकद्दर मेरा ये जान गया मैं,लेकिन?
नही जानता की मैं अब किसकी पेशानी में हूं।
वो जा चुके हैं,किसी राजा के साथ..
हां वही मैं अब भी जिस रानी में हूं..!!!
जिस्म खंडहर हो रहा है,मेरा,लेकिन
दुनिया के सामने मैं अब भी जबानी में हूँ
खत्म हो गया है हमारा किरदार जिससे...
पर मैं अभी भी उसी कहानी में हूँ।
सरकार
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