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मिडिल क्लास

Satish Srijan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न बेचारा न इतरात,
        
                                                    
                            
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

बाबा थे कितने होशियार,
अब के एम ए हैं बेकार।
मिडिल दर्जे तक किया पढ़ाई,
बड़े अफसर की नौकरी पाई।
मौज से जीवन गए बितात ।
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

फस्ट थर्ड मैं कभी न आया,
सदा मिडिल के नम्बर पाया।
मिडिल दर्जे का अफसर बना,
जो है उसमें खुश हूं घना।
ज्यादा पाने की नही आस,
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

निर्धन जीवन है अभिशाप,
जाने कितने होते पाप।
धनियों को ब्यापै संताप,
पाने खोने में पछतात।
न निर्धन न धन की बात,
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

बड़े लोग कितना कुछ पाते।
फिर भी कभी न खुश रह पाते।
दिन भर लेखा जोखा करते,
रात दिवस बस धन पर मरते।
आयकर छापा है पड़ जात।
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

मिडिल दर्जे की बात निराली,
भारत वर्ष की हैं खुशहाली।
ज्यादा टेक्स यही लोग भरते।
ऊपर नीचे कभी न करते।
नहीं दिखाते निज औकात।
सबसे बढ़िया मिडिल क्लास।

-सतीश शर्मा 'सृजन'
 
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3 वर्ष पहले
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