प्यार की कश्ती यूँ ना डगमगाएगी
इन नैनन में है तेरी राह फिर लौट के कब आएगी
वो सुकून तेरी पनाहों में वो ज़िक्र मेरे अल्फ़ाज़ों में
दबी दबी पैरों से चल के आएगी
मिटा के दिल की कसक तिश्नगी कामिल कर जाएगी
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