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फिर

shabnoor khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख तेरे दर पर आ गए हम फिर
        
                                                    
                            
तू चाहे जों भी सज़ा दे हमको फिर....

हसरत मेरी तेरी खुमारी मैं हो फिर
देख तू तुम्हें देखने के लिए बेताब फिर..

ना उलझने हो ना कोई दुश्वारी फिर
आ मिल जाए हम दीवाने से फिर...

तू समझ जा मेरे दिल की बेकरारी फिर
रात धनी तू रोशनी कर दे ज़िन्दगी मैं फिर...

मैं सोचो शबनूर वो आएगा मेरे सजर मैं फिर
यकीन मुझे उस पर एतबार बेहद सा फिर
 
3 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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