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पांच हाइकु

Shashank Misra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिशन तब
        
                                                    
                            
कमीशन अब
जन्मदिवस

भूले विचार
कल अनुयायी
सत्ता के यार

बुधुआ घर
भारत आके सोता
इण्डिया नहीं

मौज मस्ती
करवाते पर्व
आजकल के

पिसते रोज
गरीब ही गरीब
इनके राज

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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Manoj Singh

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