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भेदभाव

SHASHANK PANDEY

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां मैं भी पढ़ने जाऊंगी
        
                                                    
                            
ए बी सी डी ई एफ जी
ऊँचे स्वर मैं गाऊंगी ।
कब तक घर पर अशिक्षित बैठी,
मैं चूल्हा चकिया चलाऊंगी ।
चौका बर्तन करते-करते ,
मैं अनपढ़ ही रह जाऊंगी।
मां मैं भी पढ़ने जाऊंगी।
हम गरीब की है खाली झोली।
भैया पढ़कर सहारा बन जाएगा,
तेरे लिए तो कोई राजकुमार आएगा।
कभी ना तू उससे तुलना करेगी,
यजा चौका-बर्तन काम करेगी।
मैं तुझको समझाऊंगी ,
और काम तुझे सिखाऊंगी।
मां मैं भी पढ़ने जाऊंगी।
बाबा ने जब यह सब देखा,
बिटिया के सिर पर हाथ रखा।
जिंदा है अभी बाप तेरा,
तेरे संग आशीर्वाद मेरा।
बेटी अब तू भी पढ़ने जाएगी।
अपने सपने को पूरा कर करके आएगी।
हां तू भी पढ़ने जाएगी
लड़की-लड़के में भेद नहीं,
दोनों ने लिया है जन्म यहीं।
फिर लड़की क्यों न पढ़ने जाएगी?
अब लड़कियां भी पढ़ने जाएंगी।
हां बेटी तू भी पढ़ने जाएगी ।
तेरे पढ़ने से ही,
घर की हालत बदल जाएगी।
आने वाली पीढ़ी भी,
तुझसे यह शिक्षा पाएगी।
मैंने जो सपना देखा है,
वह पूरा करना चाहूंगी।
जब मां बीमार पड़ेगी,
मैं डॉक्टर बन के आऊंगी।
सुनकर बेटी की यह बातें,
मां की आंखें भर आयीं।
बाबा भी है साथ बेटी के,
यह देख मुख पर खुशियां आयीं।
यह भेदभाव सब छोड़कर,
अब होने लगी पढ़ाई।
मां ने स्वागत में बेटी के,
अपनी दोनों बाहें फैलायीं।

शशांक पाण्डेय
3 वर्ष पहले
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