हम और हमारा जहान
आओ आज चलें हम ऐसे जहान मे
सोचा था जो हमने अपने अरमान मे
हो जहा सिर्फ ख़ुशियाँ और हम
जहा ना हो दुनिया का कोइ गम
लौट कर आऊँ मै जब
थका-हारा शाम को काम से
देखकर चेहरा तुम्हारा हो जाऊँ खुश
और तरों-ताजा अभिराम से
आकर्षित करो जब तुम, अपने आलिंगन शैली से
खो जाऊँ तुम-मे मैं इस खुशहाली से
हो जाए एहसास खूबसूरत वादीयों का
तोड़ दे बंदिशे सारी और बना दें माहौल खुशीयों का
दें-दें दुनिया को यह प्रमाण
नही मिटा सकते हमारे स्नेह को
चाहे हो कोई भी श्कस या पुराण।।
- शौर्य गुप्ता
(प्रवक्ता,कवि)
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