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जीवन के रंग

Shilpi Agrawal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "इन दिनों चुपचाप हूँ मैं...
        
                                                    
                            
बहुत कुछ कह सुन लेने के बाद,
रहता हूँ अब दूर कहीं...
जहाँ आती है धूप दिन ढलने के बाद,
अनोखी उस जगह पर…
आता है एक पंछी...
शायद करने मुझसे कुछ बातें..
लेकिन बहुत बुलाने के बाद,
दफ्तर से लौटा करता हूँ...
मैं अब खाली हाथ नहीं...
लौटा करता हूँ लेकर एक चोंगा..
थकान का थक जाने के बाद,
उफ्फ्फ...मतलब की इस दुनिया में...
कौन है मतलबी न जाने,
फिर भी आँका करता हूँ सबको...
अब बालों को रंगने के बाद,
एक दौर था मेरा भी...
जहाँ चुप्पी की ना हंंसती  थी,
हँसती हर सूरत में...
दुनिया रंगीन दिखती थी,
आहत हूँ अब भी जिस घड़ी से...
जो बिजली बन गिरी थी मुझपर...
वो घड़ी अब काल के मुख में...
रहती है मुझपर गिरने के बाद,
छोड़ आया बहुत पीछे सबकुछ...
आगे अब डिब्बा एक खाली है,
जिसमें भरनी है चुप्पियाँ मुझको...
अबकी इस पतझड़ के बाद"

~शिल्पी अग्रवाल~


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6 वर्ष पहले
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