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दुनियावी इश्क़

Shivam Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे दोस्त कहते हैं मुझसे,
        
                                                    
                            
इश्क़ नाम की कोई चीज नहीं होती।

तो फिर बताओ,
इश्क़ की इतनी कहानियाँ कैसे है?
इश्क़ की इतनी निशानियाँ कैसे है??

या तो इश्क़ से तुम नहीं सम्भले,
या तुम से संभाली ना गयी इश्क़,
तो इश्क़ के वजूद को नकारते हो।
मौका मिलने पर,
तुम भी सोलमेट तलाशते हो।।

तो सुनों मेरे दोस्तों,
मेरे हवाले से ----

इश्क़ एक मिर्च है ।
जो सम्भाल न सका,
उसका इश्क़ तिखा है।।

जिसका सम्भल गया,
उसकी इश्क़ स्वादिष्ट है।।

जिसने चखी नहीं,
उसकी इश्क़ है सुनि सुनाई।

जैसे मिर्ची की बदनामी है उसकी कड़वाई ।
मिर्च गर पचे तो स्वाद -ए-अदब,
लगी जो जोड़ से,
तो बे-अदबी का सबब।।

पहले कर,
सम्भाल, डूब जा इश्क़ में,
फिर बताना भाई।

क्या होता है इश्क़,
और क्या होती है,
नज़दीकी, दूरी, या रुसवाई।।

- शिवम् कुमार


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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