हार नहीं है हार,
सफलता का है पहला द्वार।
तुम ही पहनोगे पुष्पाहार,
गले में कहती है ये हार।।
हार गये इस बार,
मगर नही गये तुम हार।
हार गये उत्साह अगर,
तो फिर जाओगे हार।।
हुई हार की जीत,
जीत की होती रहती हार।
गर साहस है तुममें,
खुद एक दिन 'हार' जायेगी हार।।
शिवेंद्र कुमार श्रीवास्तव
रायबरेली
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