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रोशनी

Shivhare Nihalchandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शुभ हो चंहुओर करें हम ऐसी आराधना
        
                                                    
                            
सर्वत्र हो सुख -शान्ति मन में है कामना
रोशन हो जग में जन कल्याण की भावना
समानता रहे अक्षम की न हो अवमानना
तिरोहित अंधकार हो ज्योति की बयार हो
हृदय में अनुभूत प्रेम का उदित प्रकाश हो
दहशत का अंधेरा मिटे ज्ञान का संवाद हो
तमस का प्रतिकार जगत का कल्याण हो
अनुगामनी सरसता बने प्रीत की लहर हो
जगतनियन्ता जगत में अब मैत्री भाव हो

- निहाल चन्द्र शिवहरे , झॉंसी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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