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तन्हाई

Shreya Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाँद देखा और उसकी चमक की नज़ाकत देखी।
        
                                                    
                            
आसमान में उसे अकेला देखा और ख़ुद की भी तन्हाई देखी।
भीड़ में भी तन्हा पा रही हूँ ख़ुद को, आज मैंने अपनी तबाही देखी।
वजूद खो रहा है मेरा, मैंने सच्चाई ताबीर की देखी।
ख़्वाबीदा सी हो गयी है ज़िंदगी, मैंने सुकून कहाँ है देखी?!
मैं मुंतज़ीर उस पल की फ़िर से हूँ, जब मैंने इस संजीदगी में अपनी रूहानियत देखी!

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3 वर्ष पहले
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