आज फूलों की बेगानगी देखकर
मुझको कांटों से दामन सजाना पड़ा,
फूल चुनते हुए किसी को ना चुभ जाये,
इसलिए मुझे उन काँटो को उठाना पड़ा,
मेरे दर्द को देखकर लोग हंसे,
लेकिन उनको कौन समझाये,
कि फूल चुनने वालों को ये कही चुभ ना जाये
इसलिए कांटो के दर्द को भी अपने दिल मे दबाना पड़ा,
राहों में पड़े कांटो को भी उठाना पड़ा।
- गोरीशंकर दौगांवा तिलोटी