विचित्र सी है माया, है विचित्र सा ये बन्धन,
बोझ सिर पर है संसार का पर तू है माथे का चन्दन ।
शरण में आकर मैं तेरे बस खो गया हूं,
आँखें खुली हैं माँ तु ध्यान मे है मेरे, तेरी आँचल का साया पाकर मैं भी सो गया हूं।।.
- शुभेन्द्र_सिंह
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