रामायण को कविता के माध्यम से सरल भाषा में
लिखने का प्रयास किया है। उम्मीद करती हूँ कि त्रुटि
होने पर आपलोग उचित मार्गदर्शन करेंगे।
भाग :-१
त्रेतायुग की कथा सुनाऊँ
हर्षित हुए अयोध्या वासी
रघुकुल के घर जन्म लिए
सबके प्रिय राम रघुराई
मात कौशल्या के भाग्य
की सब करते हैं बड़ाई
बालक बनकर जन्म लिए
जगत नारायण स्वयं भाई
चैत्र मास शुक्ल पक्ष नवमी
तिथि की शुभ बेला आई
कांतिवान, तेजोमय, नीलवर्ण
बालक की जन्म घड़ी आई
दुष्टों का संहार करने
जन्म लिए राम रघुराई
महाराज दशरथ खुश हो
बांटे रत्न आभूषण बधाई
मात कैकेयी ने सुत भरत
लाल को जन्म दिया
सुमित्रा ने लक्ष्मण, शत्रुघ्न
को अपने कोख से पैदा किया
देवताओं ने पुष्प वर्षा की
अप्सराओं ने नृत्य किया
गन्धर्वो ने मधुर गान किया
सबने बालकों को आशीर्वाद दिया
आज भी पूरे हर्षोंल्लास के साथ
राम का जन्मदिन मनाते हैं
लड्डू पेड़ा का भोग लगाकर
प्रभु का गुण महिमा गाते हैं
सीमा केडिया
कोलकाता
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