भ्रम का पाश तोड़कर देश को संवार दो,
कुविचारीयों की छाती पर तिरंगा गाड़ दो।
तुम्हारा है ना मेरा है सभी का यह बसेरा है,
धैर्य रख काटो अंधेरे सामने सवेरा है।
नफरत की आंधियां मीटे दिलों में प्यार हो,
तिरंगा तने गर्व से भारत की जय जय कार हो।
मज़हबी परचम जो हाथ में थमा रहे हैं,
विष घोल बंधनों में दूरियां जो ला रहे है।
नक्शे कदम पर उनके चल देश ना जलाओ तुम,
जिस गोद में पले हो दिल उसका ना दुखाओ तुम।
वतन से इश्क की कसम जो खाई है,
होली दिवाली ईद संग ही मनाई है।
न जल सकेगी याद ये न नेह तुमसे छूटेगा,
है तेरा मेरा रिश्ता वतन वतन नहीं टूटेगा।
ओढ़ लो तिरंगा हर रंग उतार दो,
कुविचारियों की छाती पर तिरंगा गाड़ दो।
रीत सिंह
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