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मिलन

S.K Gautam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कि कितनी हसरत थी तेरे दीदार की जालिम,
        
                                                    
                            

अब सामने हो फिर भी यकीन नहीं होता ।।

- गौतम मिश्रा, सीतापुर, उत्तर प्रदेश

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले
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