कोई समझाये
समझना नहीं
कोई राह सुझाये
सुनना नहीं
आगे कुआं है
कोई यह बताये
तो रुकना नहीं
क्योंकि
कुएं में गिरना
जरूरी है
मूर्खों की यही
तो मजबूरी है।
- सुभाष चंद्र लखेड़ा
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