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अनुभव

Subhash Chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई समझाये
        
                                                    
                            
समझना नहीं
कोई राह सुझाये
सुनना नहीं
आगे कुआं है
कोई यह बताये
तो रुकना नहीं
क्योंकि
कुएं में गिरना
जरूरी है
मूर्खों की यही
तो मजबूरी है।

- सुभाष चंद्र लखेड़ा

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6 वर्ष पहले
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