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मुक्तक

Subhash Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां में वालिदा ऐसी कभी होती नहीं है
        
                                                    
                            
मिलें औलाद को ग़र कष्ट जो रोती नहीं है
बनाके तू न बेगाना इन्हें यूं छोड़ जाना
बिना दीदार के तेरे कभी सोती नहीं है

वाह रे ! क्या नसीब पायी है
जिंदगी में समृद्धि छायी है
रास आये कहाँ उन्हें रिश्ते
द्वेष की आदतें  समाईं है

-सुभाष गुप्ता

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7 वर्ष पहले
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