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तस्वीर-ए-तसव्वुर......

subodh kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल रात तसव्वुर में, मुझे उसकी तस्वीर दिखी,
        
                                                    
                            
जो ख्वाबों में ना सोचा था, वैसी उसकी तस्वीर दिखी।

न जाने कैसा चेहरा है, जो आँखों में बस गया मेरे,
पूरी रात बस उसको सोचा और उस पर तहरीर लिखी।

काली आँखें, जुल्फें खुली,थी थोड़ी शरमाई हुई,
आँखों में जब उसके देखा,मेरी अपनी तकदीर दिखी।

बड़ा मासूम सा चेहरा था, हसीनाओं की वो रानी थी,
इक पल के लिए जो दूर ना हो, ऐसी हँसी उसके चेहरे पे दिखी।

गुलाबी रंगों में ऐसा लगे जैसे गुलाब कहीं खिल आया हो,
गुलाबी गालों को थी दबाए,एक हाथ में मुझे मेहंदी थी दिखी।

आवाज़ में उसकी जादू थी,जो अब तक सुन रहा हूँ मैं,
चाँद भी शरमा जाये उसे देख ऐसी मुझे तस्वीर दिखी।

अनजाना सा उस चेहरे से, इश्क हो गया है मुझे,
शायद कभी न कर पाऊं इजहार,इसलिए मैंने ये तहरीर लिखी।


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