कहीं भूल न जाना,
सत्यवान सावित्री की
तुम ये अमर कहानी।
पति पत्नी के पवित्र रिश्ते की
शादियों पुरानी कहानी।
बहुत पवित्र पावन यह रिश्ता है।
परिवार प्यार विश्वास पर टिका है।
यह केवल दैहिक भौतिक नहीं
यह एक नैशर्गिक अलौकिक सौंदर्य है
जो जीवन को दमकाता है।
जीवन से बना यह रिश्ता ,
एक नव जीवन को पनपाता है।
प्यार विश्वास पर टिका यह रिश्ता,
हर मन को भाता है।
पत्नी बिना पति है सुना,
जैसे मीन बिन नीर।
बिरह के जिसके आग में,
कितने जल गए हीर।
पति पत्नी के वियोग से बड़ा,
नहीं दुनिया में कोई पीड़ा।
अतः दाम्पत्य जीवन के माधुर्य को,
हमेशा बरक़रार रखिए।
पति पत्नी एकदूसरे का सम्मान ,
किया कीजिए।
और पति पत्नि के अमृत सुधा को,
जी भर के पीजिए ।
एक समाज की प्रथम नींव है
मजबूती से थामें रखिए।
आपसी सौहार्द प्रेम प्यार से,
इसको सदा सिंचिए।
रिश्ते की पवित्रता को सदा ,
बनाए रखिए।
रिश्ते की पवित्रता को सदा
बनाए रखिए।
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