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" भजन "

Sukhmangal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            " भजन "
        
                                                    
                            
आज भगवान मेरे मंदिर में बसना
हरे राम ,हरे कृष्ण ,बोल मन रटना |

राम जी के प्रेम में सीता दीवानी
सीता के हाथों में गजरा निशानी |

गजरा पहिराके सीता कर लिया अपना
हरे राम ,हरे कृष्ण ,बोल मन रटना |

श्री राम जी के प्रेम में मीरा दीवानी
मीरा के हाथों में वीणा निशानी |

वीणा बजाके मीरा कर लिया अपना
हरे राम ,हरे कृष्ण ,बोल मन रटना |

राम के प्रेम में थी सबरी भी दीवानी
सबरी के हाथों में वेर निशानी |

वेर खिलाके सबरी कर लिया अपना
हरे राम ,हरे कृष्ण ,बोल मन रटना |

राम भेजने से दिल ना चुराना
इस जीवन का कोई ना ठिकाना |

इ जीवन है सूखी लकडिया
अग्नि लगे से जलि जाना |

इस जीवन का कोई ना ठिकाना
इ जीवन है कागज़ की नइया |

हवा लगे इसेउड़ि जाना
इस जीवन का कोई ना ठिकाना |

इ जीवन माटी का खिलौना
इसे जीवन का कोई ना ठिकाना |

-सूखमंगल सिंह

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