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तुम को पाना ,पाकर खोना ,मेरे बस की बात नहीं

Sundar Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुमको पाना, पाकर खोना,
        
                                                    
                            
मेरे बस की बात नहीं।
तुम समझती हो ,मेरे मन को,
मैंने इज्जत गंवाई है।
तुम अब भी समझ जाओ,
मेरे मन में तन्हाई है।
तुम कितना भी जोर लगा लो,
मन से तुम्हें न छोडूंगा।
मेरे दिल की धड़कन हो तुम,
साथ यूं ही नहीं छोडूंगा।
मैंने तुम्हारी याद में ,
अश्रु रोज बहाये हैं।
बिन तुम्हारे जीवन जीना,
मेरे बस की बात नहीं।
तुम को पाना, पाकर खोना,
मेरे बस की बात नहीं ।।

मान जाओ, बहुत हो चुकी बातें,
कटती नहीं ये बैरी रातें।
जीवन बड़ा अनमोल है,
भूल जाओ अब व्यर्थ की बातें।
आ जाओ ना प्रिय,
दौड़ चली आओ ना प्रिय।
मैं विरह में कराह रहा ,
गले लग जाओ ना प्रिय।
मैं भूल जाता हूं तेरी गलती,
मेरे मन में पाप नहीं।
अब आ भी जाओ, मान भी जाओ ,
जीवन में होगी फिर कभी रात नहीं।
तुम को पाना पाकर खोना
मेरे बस की बात नहीं।।
 
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4 वर्ष पहले
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