विज्ञापन

चलता चल

sunil kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलता चल,
        
                                                    
                            
बस थोड़ा और चल,
निकट आ रही है मंजिल,
बस अब तू चलता चल,
आने वाला कल,
होगा तेरे कर्मो का फल ।

मंजिल का पड़ाव है यें आखिरी,
मुसिबतो का सैलाब है यहां भारी,
अपने अनुभवों की चला दें तू आंधी,
जीत ले आखिरी ये भी तू बाजी ।

मंजिल पाने पर मत करना तूं आराम,
क्योकि ये मंजिल तेरा नहीं है आखिरी मुकाम ।

चलता चल,
तुझे चलना होगा,
नाम इतिहास में लिखाना होगा,
सूर्य देव की भांति,
मानव कल्याण करना होगा ।

सुनील तेवतिया
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manoj Singh

1541 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6732 कविताएं

View Profile