चलता चल,
बस थोड़ा और चल,
निकट आ रही है मंजिल,
बस अब तू चलता चल,
आने वाला कल,
होगा तेरे कर्मो का फल ।
मंजिल का पड़ाव है यें आखिरी,
मुसिबतो का सैलाब है यहां भारी,
अपने अनुभवों की चला दें तू आंधी,
जीत ले आखिरी ये भी तू बाजी ।
मंजिल पाने पर मत करना तूं आराम,
क्योकि ये मंजिल तेरा नहीं है आखिरी मुकाम ।
चलता चल,
तुझे चलना होगा,
नाम इतिहास में लिखाना होगा,
सूर्य देव की भांति,
मानव कल्याण करना होगा ।
सुनील तेवतिया