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शायरी......

suraj vishwas

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये तेरे हुस्न का जादू है या मौत की कोई साजिश तो नहीं
        
                                                    
                            
अदाओं पे अपनी कुछ तो पाबंदिया रखो
यूँ मेरी धड़कनों का बार बार रुक जाना मुनासिब तो नहीं



- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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