गीत प्रेम का गाते चलो
छोड़ राग और द्वेष भाव
गीत प्रेम के गुनगुनाते चलो।
आज यहाँ जो तेरा है
कल हो जाना किसी ओर का है
चार दिन की ये ज़िन्दगी
मिलकर साथ निभाते चलो
गीत प्रेम के गाते चलो।
- सुरेंदर कुमार (गोवा)