कुछ मुलाकातों में ही,
वो दिल में उतर गए,
आवाज़ उनकी किसी धुन सी,
कानों में घुल गए..!
बातें उनकी मन ही मन दोहराता हूं,
बेवजह बिना बात के मुस्कुराता हूं...!
उसे ना पा सकने के ख्यालों से
ही बेचैन हो जाता हूं,
बड़ी मुश्किलों से फिर,
ख़ुद को समझाता हूं...!
उसकी हसरत लिए रुखसत ना हो जाऊ इस जहां से,
ख़ैर अब इंतेज़ार होगा तेरा उस जहां में,तब तक तेरा दीदार कर लिया करेंगे उस जहां से...!!!