जंगल में नया नया हाथी जो आया ।
पुरानी व्यवस्था पर बहुत चिल्लाया ।
हाथी सी चाल पर उसने भड़काया ।
जानवरो को चीते सा जोश बताया ।
लाल आंखे फाड़ नेताओ को कोसा ।
पड़ोसियो को हराने का दिया भरोसा।
सालो की अव्यवस्था का रोना रोया
जल्द सुधारने का सब्जबाग दिखाया।
सब जानवरो को बहुत मजा आया ।
वादे बड़े देख सबको भरोसा आया ।
सिरफिरे चिललाये,चीता नही हाथी है ।
चीता की चाल का वादा छलावा है ।
पर जादू सिर चढकर जब बोलता है ।
जानवरो के हाथ हाथी जीत जाता है।
हाथीभक्तो ने जीत का जश्न मनाया ।
चख चखकर सबने पिया और पिलाया
हाथी अब आंखे लालकर जब गुर्राया
पर यह क्या जबान से वो लडखडाया
जब उठकर लात को जैसे ही घुमाया
जमीन पर खुद को धराशायी ही पाया
सुबह होश में वो जानवरो के बीच आया
कुछ और समय की मांगकर मिमियाआ।
बोला इतने कम समय मे होता ही क्या है
विपक्ष जितना समय मांग वो मुस्कराया ।
जानवरो का जोश फिर जगह पर आया।
जानवरो ने फिर अपना भरोसा जताया ।
एक और मौका जानवरो से पाकर हाथी
और मजबूती से वो जीतकर फिर आया।
मिला जो अभयदान हाथी फिर गुर्राया ।
आंखे लाल कर पड़ोसियो को हड़काया ।
सामने खड़ा चूहा लाल आंख से गुर्राया ।
हाथी को दुबका सा कोने में पड़ा पाया।
शेर तो शेर चूहे को भी डरा नही पाया ।
नया नया हाथी जो इस जंगल मे आया।