लेकर कलम हाथ ,
सीधे रखकर माथ,
मन के भावों को सभी,अब लिख डालिए ।
जैसे भी आए विचार,
कर सबको स्वीकार ,
लेकर कोरा कागज , उसमें उतारिए ।।
साथी है यही कलम ,
मन में न हो भरम ,
जो भी हैं सुजान इसे, पास सभी राखिए ।
आती है बहुत काम ,
होता है इसी से नाम,
'' राम ''पढ़ लिखकर, जिंदगी सवांरिए ।।
-shivkumar barman