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कविताएं

Surya Barman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आखिर यह कैसा नशा है इस दौर के नौजवानों में
        
                                                    
                            
बेफिक्र सो रहे हैं सभी जलते हुए मकानों में

शोले से उठ रहे हैं हर तरफ दिलो में आज
मुहब्बत का सैलाब पैदा करो इसे बुझाने में

करो फिक्र अब सारे मखलूक के हिफाजत की
खत्म हो जायेगी दुनिया खुद को अब बचाने में

इन्सानों के दिल हो गये आज मशीनों की तरह
गीता वो कुरआन बेअसर लगते इस ज़माने में

इन्सानियत का ये बदतर मुकाम है तरक्की
आदमी खुद उलझ गया है अपने ताने बाने में

छीन लो दर्द लाओ खुशहाली घर-घर में खालिद
लगा दो सारी उम्र ज़मीं पे जन्नत बनाने में
3 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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