मुलाकात
उनकी पलके उठी थी पर नजर चुकी थी।
दोनों कुछ कहने के लिए परेशान थे।
घुंघट में जो चांद था,
कुछ यूं कहिए एक दूसरे से अनजान थे।
दिल कभी इतना परेशान ना हुआ था,
पहली बार जो उनसे पहचान हुआ था!
उनसे शर्मा रही थी,
पर वो जनाब कुछ और ही सुना रहे थे।
कुछ इस कदर दिल बेचैन हुआ,
जब उनसे पहली नजर मिली।
बैठे थे एक साथ , एक साख पर,
फिर भी एक दूसरे से अनजान थे।
ना उन्हें कुछ खबर थी,
ना हमें कुछ खबर था,
बस यूं कहिए एक दूजे के कदरदान थे।
जनाब कुल मिलाकर क्या कहूं,
हम दोनों ही परेशान थे।।
सूर्यकांत 'निराला'
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