जय भारत
(सरसी छंद में गीत )
डॉ सुशील शर्मा
है विकास के पथ पर आगे
मेरा भारत देश।
नीला अंबर उच्च हिमालय
सुंदर सभी चरित्र।
सागर चरणों को है धोता
भारत परम पवित्र।
कश्मीरी वादी से लेकर
कन्या तलक सुदूर।
कच्छ क्षेत्र से अरुणांचल तक
सुंदरता भरपूर।
खनिज सम्पदा से परिपूरित
माटी मधुर महेश।
दौड़ रहा इक्कीस सदी में
भारत देश महान।
चले निरंतर सबसे आगे
ये हम सबकी जान।
ये पचहत्तर वर्ष हमारे
बना गए इतिहास।
विश्व-क्षितिज पर भारत चमका
बन कर सूर्य प्रकाश।
विश्व पताका बने तिरंगा
जन जन का आदेश।
हम विकास के पथ पर आगे
चलते चलें अटूट।
चाहे कोई कितना तोड़े
पड़े नहीं अब फूट।
शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि में अव्वल
सबसे आगे अर्थ।
हरपल हरदम आगे बढ़ते
समय नहीं हो व्यर्थ।
उन्नत देश हमारा प्यारा
विमल कमल अवधेश।
बेटी दलित गरीब सभी को
मिले सुरक्षा चक्र।
गुंडे और लुटेरों पर हो
सबकी दृष्टि वक्र।
जाति नस्ल रँगभेद सभी से
अब भारत हो दूर।
सपने सब हम सच कर जाएँ
मेहनत हो भरपूर।
अविचल अटल हमारा भारत
हम सबका प्राणेश।
आतंकी जड़ से मिट जाएँ
हों शत्रु सब पस्त।
मिटे अशिक्षा और गरीबी
बच्चे हों सब मस्त।
रचनात्मकता से ही होंगे
पूरे सपने मित्र।
जीवन लक्ष्यों का निर्धारण
निर्मल सत्य चरित्र।
जन जन को धारण करना है
संघर्षों का वेश।
तंत्र सदा गण की सेवा में
यही सफलता मंत्र।
हो गरीब अब सबसे आगे
खंडित हो षड्यंत्र।
निर्भर नहीं किसी पर भी हम
हो समान अधिकार।
सत्य अहिंसा और एकता
हों जीवन आधार।
रहे अग्रणी मेरा भारत
विश्व बने अनुवेश।
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