दिल में मची एक हलचल,
मैं बना शिव पिया हलाहल.
अपने रिस्ते नाते हुये पराये,
बूढ़ा अब किसी को न भाये.
सबने अपने किस्मत बनाये,
जिंदगी में सब आगे बढ़ गये.
मैं अवाक व हतप्रभ बन बैठा,
जीवन मुझसे इस कदर रूठा.
इसकी आशा मुझे सपने में भी न थी,
संवेदना व हया लोगों में ही न बची थी.
हृदय का कोलाहल मचा दी हलचल,
जीते जी मैं बन गया सम्पूर्ण घायल.
मेरा धर्म मेरी आस्था है अब भी जिंदा,
समाज का रूख बदला मेरी क्या खता.
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