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धरोहर

Swapankumar Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अन्त से अनन्त की यात्रा,
        
                                                    
                            
काशी उज्जैन से निकलता।
दोनों है प्रिय शिव की नगरी,
भैरव जहां के हैं दक्ष प्रहरी।
मणिकर्णिका शिव का श्मसान,
संवत गणना उज्जैन का दान।
हिन्दू सभ्यता संस्कृति का खान,
नाज उन पर करता देश जहान।
आततायियों ने मठ मंदिर तोड़े,
सब नष्ट कर दिये विरासत हमारे।
फिर हम जागे जागी हिंदू संस्कृति,
नौजवानों करो इसकी बंदना स्तूति।
हिन्दूत्व एक सनातनी जीवन शैली,
दुनियां इसे समझती एक पहेली।
ज्ञान भक्ति योग अहिंसा संस्कार,
विश्व हमारा कुटुंब और परिवार।
लुप्त आज मायान इंका सभ्यता,
स्मृति श्रुति बचायी वैदिक सभ्यता।
वेद उपनिषद गीता हमारी विरासत,
विश्व में हमारी पहचान बढ़ी सतत।
3 वर्ष पहले
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