सत्य.....
सत्य कड़वा है पर अमृत है,
सत्य मार है पर ढाल भी है।
सत्य निश्छल है , निष्कपट है और निष्ठुर भी है,
सत्य की जीत तय है, सत्य के आगे हार ही है।
सत्य अदृश्य नहीं, सत्य उजागर है,
सत्य अभेद्य है, अगम्य है।
सत्य यत्र, तत्र,सर्वत्र है,
सत्य तुझमे भी है और मुझमे भी है।
सत्य की राह दुर्गम है और तय कर लो तो सरल भी,
सत्य एक खोज है, और मिल जाए तो मोक्ष है।
सत्य भक्ति है,आस्था है,
सत्य जीने का एकमात्र कायदा है।
सत्य अकेला सही, कमज़ोर नहीं,
सत्य अडिग, स्थिर,अटल है।
सत्य किंतु परंतु नहीं,
सत्य सिर्फ पूर्ण विराम है ।।
तनुजा