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स्मृतियां

Taxas Sri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम नहीं हो फिर भी तुम हो
        
                                                    
                            
तुम हो फिर भी नहीं हो
कर्म अपना प्रभाव दिखा जाते

कुछ दिल को दर्द देती
कुछ दिल को प्रफुल्लित करती है
कुछ हमेशा के लिए रह जाती है

माता-पिता का अपने बच्चो के लिए त्याग
वीर जवानो का देश के लिए त्याग
सदभाव के लिए नागरिकों का त्याग
सुमधुर सम्बन्धो के लिए त्याग

कुछ नहीं रहता जीवन बस रहती तो केवल स्मृतियां 


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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