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दहलीज

The Zero

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दहलीज पर हूं
        
                                                    
                            
लगा दुनिया छूटी
बारिश हो रही है
पीछे है महकती मिट्टी

रूठा है हर कोई
गाँव, खाट और खेत
टकटकी लगाए हुए
गाय, बकरी और भैंस

हिम्मत की मैंने
कदम पहला रखने की
ठिठुर गया शरीर
मानो शामत आयी हो प्राण की

दोपहर की भंवराहट
शान्त होने को है
शक उसे भी हुआ है
मेरी इस करतूत पर

बड़े औहदे की आंस में
स्वार्थ की तलाश में
बहुत से अपनों का
मुजरिम बन बैठा हूं मैं

दहलीज पर हूं
लगा दुनिया छूटी
बारिश हो रही है
पीछे है महकती मिट्टी


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6 वर्ष पहले
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