माना मंजिल यह दूर है
हर हाल जाना जरूर है
सब मिलकर दीप जलाएगें
तब अँधेरे छट पाएगें
सब मिलकर कदम बढ़ाएगें
तब ही मंजिल को पाएगें
तब आएगा सुखद सवेरा
मन सदा खुशियों का डेरा
बहेगी शीतल मंद पवन
प्रफुल्लित होगा तन व मन
हरियाली भी छा जाएगी
ये कलियां भी खिल जाएगीं
चहकेगीं चिड़िया भरपूर
हो जाएगा सन्नाटा दूर
फूलों से खुशबू आएगी
तितलीयां मौज मनाएगीं
आ जाएगी वो भी घड़ियाँ
मिलेगी सोने की चिड़ियाँ
बढ़ेगा तब भाईचारा
मिलेगा न कोई हत्यारा
भारत फिर विश्व गुरु होगा
सतयुग फिर से शुरू होगा
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