विज्ञापन

नेह...

umesh shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नेह की सघन फुहार ही
        
                                                    
                            
बस जीवन की दरकार

जहाँ भी इसका अभाव हो
वहाँ सब सुविधाएं बेकार

नेह से बनते संवरते हैं जग
के सभी क्षेत्रों के कामकाज

जहाँ भी इसका लोप हो तो
वहाँ अराजकता का राज

मन में सदैव पुष्ट कीजिए
परस्पर नेह का भाव

ताकि कभी कहीं महसूस
न किसी तरह का अभाव
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

SANDEEP PANDEY

80 कविताएं

View Profile

hem priya

444 कविताएं

View Profile

Arjun Prabhat

37 कविताएं

View Profile