नेह की सघन फुहार ही
बस जीवन की दरकार
जहाँ भी इसका अभाव हो
वहाँ सब सुविधाएं बेकार
नेह से बनते संवरते हैं जग
के सभी क्षेत्रों के कामकाज
जहाँ भी इसका लोप हो तो
वहाँ अराजकता का राज
मन में सदैव पुष्ट कीजिए
परस्पर नेह का भाव
ताकि कभी कहीं महसूस
न किसी तरह का अभाव
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।