क्या घर का मालिक भी,
किरायेदार होगा कभी।
यदि हवाएं ऐसे ही चली,
हिस्सेदारी खोयेगा कभी।
जिसके हाते में,
रंग - बिरंगे फूल खिला करते थे।
मिल्कियत के नाम पर,
वो किस्सेदार होगा कभी।
कौन बार-बार हमें,
निकालने की धमकियाँ दे रहा।
कोई और नही 'उपदेश',
वही रिश्तेदार होगा कभी।
उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद