बेबाक होकर, जब से हम-तुम मिले।
मुरझाए चेहरे, किस्मत से फिर खिले।।
सोचा था, तुमसे कभी प्यार न करेगे।
बेबसी हमारी, कि हर बार तुम मिले।।
ये उम्र देखते-देखते, यों ही गुजर गई।
जो रूठी थी जमाने से, उसे तुम मिले।।
दरिया दिल की कहानी, आज हो गई।
हर गुजरे दौर में, बार-बार तुम मिले।।
प्यार का बीज, बोया था कभी हमने।
'उपदेश' की कसम, जिंदा दिल मिले।।
उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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