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मनमीत से दूरियाँ

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मनमीत से दूरियाँ हो, वियोग के लिए।
        
                                                    
                            
जतन करना पडेगा, संजोग के लिए।

चाहतो की दम, कमजोर पडती नही।
तडप बढती जा रही, संभोग के लिए।

कहते है, आशिक के दिल की बेचैनी।
मौसम बदल देती है, प्रयोग के लिए।

अब तो हद हो गई, इंतजार करने की।
कोई और ढूंढो 'उपदेश', योग के लिए।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
3 वर्ष पहले
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