चोरी से बुलाया, इकरार किया।
मुश्किल से खुद को, तैयार किया।।
इश्क हमारा, चर्चा में न आयेगा।
ये सोचकर, जी भरके प्यार किया।।
मुझें क्या पता, माँ बन जाऊँगी।
हंसी हंसी में, हद को पार किया।।
जब चैक किया, पोजिटिव पाया।
माथा ठनका, दीदी से रार किया।।
खुद्दारी देखो, जी लूँगी सह लूँगी।
क्या कहती, मैंने व्यभिचार किया।।
नारी सशक्तिकरण के 'उपदेश' से।
कामकाजी स्त्री ने, आर-पार किया।।
उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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