विज्ञापन

पल न बीता

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पल न बीता, फिर भी सांस न घबराई।
        
                                                    
                            
बैठे-बैठे ही सो लेती, आती न अँगडाई।
घर में काम बहुत पडा, करने को बाकी।
कब से होठों पर, लिपस्टिक नही लगाई।
कभी लगे, तुम अभी-अभी आ जाओगे।
ये मुझको पता नही, कब होगी सुनवाई।
यादो की माया नगरी, और भूले 'उपदेश'।
हिचकी शायद भूल गई, तुमको न आई।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all